प्रिय कृष्ण

प्रिय कृष्ण, आप ही साधन आप ही साधना आप ही साध्य है आप ही भक्ति आप ही प्रेम आप ही प्राण आप ही योग है आप ही श्रृंगार आप ही हर रंग आप ही हर राग है आप ही वैराग्य आप ही मोक्षदाता आप ही मोक्ष है – Pooja R. | © 2022 Tatva Musings